विपिन कुमार बहुगुणा
एक प्रसिद्ध हीरोइन की तस्वीर परदे पर दिखाई जा रही है और एंकर आह्वान कर रहा है कि देखो, पहचानो और बताओ ये कौन है. कोई कभी कभार फिल्म देखने वाला भी बता सकता है कि ये हेरोइन काजोल है अथवा करीना कपूर है. पर जाने क्यों कोई भी नहीं बता पा रहा. रह रह कर घंटी बज रही है. लोग कुछ भी बता रहे हैं पर सही नाम नहीं बता रहे हैं.ये लोग क्या उन्ही लोगों का फ़ोन उठा रहे हैं, जिन्हें कुछ नहीं पता. साफ़ लग रहा है कि कुछ गड़बड़ है. लेकिन टीवी पर गड़बड़ प्रोग्राम कैसे चल सकते हैं. और ऐसे प्रोग्राम आजकल टीवी पर बहुतायत में जारी हैं.
मैंने सोचा कितने भोले लोग फ़ोन करने पर लगे हैं. हमें तो पता है कि ये करीना कपूर हैं तो बता देते हैं. फ़ोन उठाया और लगे मचलने बताने कि लिए. एकदम से फ़ोन लग गया. आप लाइन में हैं. आपकी कॉल हमारे लिए बहुत ज़रूरी है. लाइन में बने रहें. आप ५०,००० रुपये जीत सकते हैं. बस आपको थोड़ा इंतजार करना होगा.
टीवी में लगातार एंकर आह्वान कर रहा है कि जल्दी कीजिये, फ़ोन उठाइए, पहचानिए और बताइए कि ये कौन है. हम फ़ोन पर इंतज़ार कर रहे हैं कि सही बताएँगे पर टीवी पर जिनके फ़ोन उठाये जा रहे हैं वो गलत पर गलत बताये जा रहे हैं. हम झुंझलाए जा रहे हैं और सही बताने के लिए बेताब हुए जा रहे हैं. फिर एक और फ़ोन आया और उसने इस तस्वीर वाली हेरोइन को मुधुबाला बताया. मैं फिर झुंझलाया. मधुबाला, क्या कह रहा है. किस ज़माने कि हेरोइन को किस ज़माने कि बता रहा है. जब कन्फर्म नहीं था तो बताने की क्या ज़रुरत थी. मेरा नंबर तो लग नहीं रहा और ऐसे फालतू लोगों का नंबर लग रहा है. साफ़ साफ़ करीना कपूर की फोटो है. इस समय भी उसकी दो फिल्मे सिनेमाहाल में चल रही हैं. फिर ये सब क्यों नहीं पहचान रहे. इतनी मशहूर हेरोइन है. मुझे ही बताने का मौका मिल जाता तो बता देता. ८ मिनट हो गए थे. मेरे फ़ोन पर वही रटंत विद्या चल रही थी. आप लाइन पर बने रहें. इतने में दोस्त का फ़ोन लैंड लाइन पर आया. उसने शिकवा किया. क्या यार मोबाइल बुस्य रखते हो. मैंने झट बताया, यार वोह लोगों को समझ ही नहीं आ रहा टीवी पर साफ़ साफ़ करीना कपूर दिखाई जा रही है पर कोई पहचान ही नहीं पा रहा. मैंने फोन मिलाया हैं और मैं सही बताने वाला हूँ. दोस्त पहले तो हंसा फिर बोला अबे जल्दी से काट मोबाइल की कॉल लग रही हैं. मैंने कहा वो तो लगेगी ही. तो क्या हो गया. इनाम भी तो ५०,००० का है. दोस्त कहने लगा पहले मोबाइल से नंबर काट फिर बताऊंगा. मैंने कहा अभी १२ मिनट हो गए हैं. बस अब लगने ही वाला है. क्यू में हूँ यार समझता नहीं तू. वो बोला मैं तो समझता हूँ पर तू नहीं समझ रहा पहले फोन काट वो वाला. फिर बताता हूँ कहानी क्या है. मैंने मन मसोस कर फोन काट दिया. और दोस्त से बोला. अब बता मामला क्या है.
दोस्त ने बताना शुरू किया. ये सब मिली भगत का मामला है. जितनी देर तुम्हारी कॉल रहेगी १२ रुपये प्रति मिनट के हिसाब से पैसे बनते रहेंगे. अब तुम अपना बैलेंस देखोगे तो पाओगे वो सॉ रुपये से भी अधिक कट गया होगा. आप जैसे समझदार देश में बेहिसाब हैं. वो सब लाइन मिला कर प्रोग्राम देख रहे होंगे और अपनी कॉल लगने का इंतज़ार कर रहे होंगे. उनके अपने आदमी इस दौरान गलत सलत बता कर टाइम पास कर रहे हैं और आप खिज़ते जा रहे हैं क़ि कोई सही क्यों नहीं बता रहा. यही खेल है प्यारे. खेल खेल में खेल हो रहा है. आप देखते रहो बताने का इंतजार करते रहो और आपके खीसे से रूपये का बोझ कम होता रहेगा.
लेकिन ये धोखाधड़ी खुलाम्खुला कैसे चल रही है.
बस ऐसे ही है. प्रोग्राम से पहले चेनल ने दिखा दिया होगा क़ि इस प्रोग्राम से उनका सरोकार नहीं है या ये विज्ञापन कार्यक्रम है. अब आप जाने और आपका भाग्य. फंसो तो ठीक न फंसो तो आपकी किस्मत. लुटो तो ठीक बच जायो तो ठीक. राम क़ि नगरी है लूट सके जो लूटे. फोन के ऐसे प्रोग्राम तो और भी बहुत हैं. जैसे आप अपना भविष्य जानिए. एकदम मुफ्त. पर कॉल के पैसे तो हिडन हैं. वो तो आपको तब पता लगेगा जब आप बिल देखेंगे या बैलेंस देखेंगे. तब पता चलेगा क़ि कैसे कई सौ रुपये आपके भविष्य बताने वाले ने बैक डोर से ले लिए. भविष्य बताने वाला बहुत आहिस्ता आहिस्ता आपसे जानकारी लेगा. जितना ज्यादा से ज्यादा समय लग सकेगा लगाएगा. आप पंडित जी पंडितजी कहते रहेंगे और वो आपसे कहेगा थोड़ा रुकिए गणना करके बता रहा हूँ. आप भी खुश होंगे क़ि पंडितजी ऐसे ही नहीं बता रहे पूरी ग्रहों क़ि गणना हो रही है. वो अलग बात है क़ि फोन कॉल के पैसे अलग से गिने जा रहे हैं.मैंने पड़ताल क़ि तो एक सज्जन ऐसे भी मिल गए जो अकेले में मन बहलाव के लिए लड़कियों से बात करते रहे सप्ताह भर. उनका मोबाइल पोस्ट पेड़ था. उनके होश फाकता तब हुए जब फोन पर मेसेज आया क़ि अब आपकी ५००० रूपये क़ि बिल लिमिट ख़त्म हो गयी है. यदि आगे कॉल करनी हो तो कृपया ऑफिस में ५००० रुपये का भुगतान कर दें. ये दिल्ली नगरिया है बबुआ बात करने के पैसे लगते हैं. मुफ्त में कुछ नहीं होता है. कदम कदम पर लूटेरे हैं आपको खुद बचके चलाना है. कोई वैसे जेब काटने को खड़ा है कोई ऐसे भी जेब काट रहा है. मजेदार बात है क़ि आपको पता ही नहीं चल रहा है और आप ख़ुशी ख़ुशी जेब कटवा रहे हैं. है न खेल खेल में खेल.
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